मनमोहक चाँदनी रातों में भी
दिल के किसी कोने में छुपी है सदा सी तन्हाई।
दर्द भरी ये ज़िन्दगी जो चल रही है,
किसी अजनबी सफर पे ले जा रही है मुझको,
बेखुद हो जाने कितने रास्तों पे।
खो गया हूँ मैं अपनी ख्वाबों में,
जैसे राहों में खो जाएँ कितने सपने।
यादें हैं मेरी वो कितनी ही ख़ूबसूरत रातों की,
जब तेरी बिना गुज़रती थी वो लम्हे मेरी तन्हाई।
बिखरे ख्वाब और टूटी ख्वाहिशें,
बदल गये मेरे हालात मेरे दर्द की गहराइयों में।
ज़िंदगी की राहों में कितनी मुश्किलें,
कितने मोड़ हैं जो छुपे हैं मेरी आँखों के पलकों के पीछे।
तेरी यादों से जुदा हो कर,
ज़िंदगी की राहों में कदम बढ़ रहा हूँ।
प्यार की बारिशों में भीग रहा हूँ मैं,
मगर दिल के रिश्तों की सूखी धरती पर खड़ा हूँ।
तेरी यादों के साये में बसी है मेरी तन्हाई,
बिना तुझे मेरी दुनिया अधूरी सी लगती है।
जब से तू दूर गया है मेरे पास सब कुछ,
बस खोता जा रहा हूँ मैं खुद को दिन रात में।
खुद को तलाशते-तलाशते जिंदगी गुज़र रही है,
ख्वाबों की दुनिया में कितनी ही राहों पे खो गया हूँ।
ज़िंदगी की राहों में कितने ही सवाल खड़े हैं,
जिनके जवाब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते मैं खुद को खो गया हूँ।
कहाँ गये वो दिन जब हंसते-हंसते जीना चाहते थे,
आज के दिन तो सिर्फ तन्हाई के साथ ही सोना चाहते हैं।
कभी खुशियों की बारिशों में भीगते थे हम,
आज के दिन तो अपने आँसुओं से ही जीना चाहते हैं।